ड्राइवर का तजुर्बा
बीड़ी पीना भी एक कला है और अगर यह कुछ काम करते हुए पी जाएं और किसी को पता न चले तो यह ओर भी ज्यादा कलाकारी लगती है। हम में से कई लोग अपने सफर के लिए बस का प्रयोग करते है जैसे कहीं जाना हो तो बस में ही जाते है। अच्छा तो जो बस जा सबसे जरूरी व्यक्ति जो ड्राइवर होता है वो भी अलग अलग तरह के होते हैं कई बिल्कुल साधारण जैसे होते है और कई कुछ कलाकार जैसे होते है। मैं भी बस में बहुत सफर करता हु कई तरह के ड्राइवर देखे हैं। तो ऐसे ही कुछ कलाकार ड्राइवर है जिनकी एक कलाकारी के बारे में बात कर रहा हूँ जो है बीड़ी पीना। जनाब तो ये कलाकार ऐसे होते हैं कि जो मर्ज़ी हो जाये ये बीड़ी पीना नही छोड़ते। ओर कलाकारी भी ऐसी की चलती बस में बीड़ी जला कर पी भी लेते हैं ओर किसी को पता भी नही चलता। ये जनाब अपनी पूरी ठाठ से बीड़ी पीते है और मस्त होकर चलते रहते हैं

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