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Showing posts from August, 2019

ड्राइवर का तजुर्बा

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बीड़ी पीना भी एक कला है और अगर यह कुछ काम करते हुए पी जाएं और किसी को पता न चले तो यह ओर भी ज्यादा कलाकारी लगती है। हम में से कई लोग अपने सफर के लिए बस का प्रयोग करते है जैसे कहीं जाना हो तो बस में ही जाते है। अच्छा तो जो बस जा सबसे जरूरी व्यक्ति जो  ड्राइवर होता है वो भी अलग अलग तरह के होते हैं कई बिल्कुल साधारण जैसे होते है और कई कुछ कलाकार जैसे होते है। मैं भी बस में बहुत सफर करता हु कई तरह के ड्राइवर देखे हैं। तो ऐसे ही कुछ कलाकार ड्राइवर है जिनकी एक कलाकारी के बारे में बात कर रहा हूँ जो है बीड़ी पीना। जनाब तो ये कलाकार ऐसे होते हैं कि जो मर्ज़ी हो जाये ये बीड़ी पीना नही छोड़ते। ओर कलाकारी भी ऐसी की चलती बस में बीड़ी जला कर पी भी लेते हैं ओर किसी को पता भी नही चलता। ये जनाब अपनी पूरी ठाठ से बीड़ी पीते है और मस्त होकर चलते रहते हैं  ऐसे ही आज इन्हें देख कर इस बीड़ी पाइन की कला से ज्यादा रूबरू हुआ। जनाब बीड़ी भी पी गए और किसी को पता भी नही चला।😂

बस और मोटी आंटी

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दिनांक 10/08/2019 बस में बैठे हुए बोर हो रहा था तो सोचा कुछ किया जाए। बहुत देर फ़ोन में लगे रहने के बाद blog की याद आयी डाऊनलोड किया और लग पड़ा आब यहीं टाइम पास करने। वैसे बता दूँ की में अभी जसूर जा रहा हूँ। कंप्यूटर बीमार हो गया है तब इसके इलाज के लिए वहाँ ही ले जाना पड़ रहा है जहां से इसको बीमारी लगनी शुरू हुई थी। आज मम्मी पापा भी आ रहे है भरमौर से पता नही क्या होना मेरा जब से घर मे समन गया है तब से हाल बेहाल हो गए हैं। बस का सफर भी आपने आप मे नई दुनिया को देखने का होता है। नये नये लोग अलग अलग विचारो से भरे हुए। हाहाहाहा एक आंटी की सकल देख कर कुछ याद आया। अभी थोड़ी देर पहले हम नागनी पहुंचे थे जहां आजकल नागनी माता के दर्शन के लिए लोग आ रहे है बहुत भीड़ हैं वहां। तो हुआ ऐसा की बस लोगो को चढ़ाने के लिए वहाँ रुकी मुझे भी वहीं पर सीट मिली थी में बैठा हुआ था और 1 आंटी वहां बस में चने लगी वेसे देख कर तो ठीक ठाक खाते पीते घर की लग रही थी।  पर इतनी भी मोती नही लग रही थी कि बस में ही न चढ़ा जाये। उस आंटी ने 1 हाट में आइसक्रीम ली हुई थी। और दुसरे हाथ मे पर्स लिया हुआ था 3,4 बाद बस में चढ़ने की कोशि...