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Showing posts from November, 2019

निःशब्द हूँ

रात के 1 बज रहे है लेकिन पता नही आज नींद क्यों नही आ रही। ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हो रहा है अक्सर ऐसा होता है कि कई बार रात को बहुत लेट नींद आती है। लेकिन आज कुछ बात अलग है। समझ नही आ रहा कि कैसे लिखूं मन की बात को। सोशल मीडिया के जरिये पहली बार इस बात का पता चला कि क्या हुआ है हैदराबाद की घटना को पहली बार सुनते ही रूह काम गयी है कि कोई कैसे आपने शरीर की हवस मिटाने के लिए इस हद तक जा सकता है। समझ नही आ रहा कि कौन है ये लोग जो इस तरह की हरकतों को करते हुए जरा भी नहीं सोचते कि इस तरह की हरकतों का समाज पर क्या असर आदत है। देश को तबाह करने में और नीचे गिरने में इस तरह की मानसिकता बाले लोगों का हाथ सबसे ज्यादा है। देश के लिए कुछ कर नही सकते तो कम से कम ऐसी हरकतें तो न करो जिससे यहां रहने बाले लोगो को आपने ही घर में रहने से डर लग जाये। ये डर की बात न केवल उन लड़कियों के लिए है अपितु उस बाप के लिए भी डर की बात है और उस भाई के लिए भी डर की बात ये डर की बात उस पति के लिए भी है और उस बच्चे के लिए भी है जो अपनी बेटी, बहन, पत्नी और अपनी माँ का घर लौटने का इंतजार कर रहे है। आज हर जगह सोशल मीडिया ...

महाराष्ट्र राजनीति का खेल

हाल ही में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों ने राजनीति को एक दक्षिण भारतिय फिल्मों की तरह बना दिया है। जैसे इन फिल्मों में कुर्सी के लिए लड़ाई चली होती है बस उसी तरह से ही यहां भी देखने को मिल रहा है को किसका साथ है किसी को कुछ पता नही। 4 प्रमुख पार्टियां महाराष्ट्र की कुर्सी पर बैठने की दौड़ में भाग रही है भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी। इन चारों पार्टियों में को किसका आपना है और कौन पराया है इन पार्टियों को खुद भी नही पता। इस मामले को थोड़ा विस्तार ते समझता हूं कि ये कब शुरू हुआ और कैसे हुआ। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के नतीजे 24 अक्टूबर को आ गए थे यहां 288 सीटों में  भारतीय जनता पार्टी ने 105, शिवसेना ने 56, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 54, कांग्रेस पार्टी 44 और बाकी सीटों पर अन्य का कब्जा रहा। बात इसके बाद शुरू हुई जब सरकार बनाने की बारी आई बहुत के लिए किसी के भी पास 145 सीटों का होना अनिवार्य था लेकिन यहां किसी भी पार्टी के पास बहुत नही था इसलिए गठबंधन की सरकार बनाने की बारी थी जिसके लिए सबसे पहले पुराने दोस्त शिवसेना ओर बीजेप...

मैं और मेरी गद्दी बोली

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वैसे तो में कांगडा में रहता हूँ, लेकिन हूँ मैं चम्बा जिला के हड़सर गांव से। पहाड़ो के बीच एक छोटा सा गांव हैं। चम्बा जिला के जिस हिस्से से में हूँ उस तरफ ज्यादातर लोग गद्दी हैं और उनकी बोली भी गद्दी ही है। मैं भी इन्हीं लोगो मे से एक हूँ। आज के समय मे युवा वर्ग अपनी संस्कृति को शहरों की तरफ आ कर भूल रहे हैं। आधुनिकीकरण का तूफान इस कदर हमारी संस्कृति पर पड़ रहा है कि युवा अपनी संस्कृति को धीरे-धीरे भूल रहा है आज के समय में माता-पिता भी अपने बच्चों को अपनी संस्कृति से दूर कर रहे हैं। मैं नही कहता कि समय के साथ चलना गलत बात है लेकिन अपनी संस्कृति को छोड़ देना ये भी सही नहीं है। बोली भी हमारी संस्कृति का ही हिसा हैं और जैसे जैसे लोग शहरों की तरफ आ रहे हैं वैसे वैसे वह अपनी बोली को भी गांव में ही छोड़ रहे है। मुझे आपने गांव से दूर रहते हुए लगभग 15 साल हो गए है लेकिन जब से मैं गांव से आया हूँ तब से आपने आप को एक पल भी ऐसा एहसास नही होने दिया कि मैं इस बोली से अलग हो रहा हूँ और न ही कभी इसे बोलने में शर्मिंदगी मेहसूस की। बोली एक हमारी ऐसी पहचान है जिसके जरिये लोग हमें बिना हमारे बारे में पूछे ही...