महाराष्ट्र राजनीति का खेल
हाल ही में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों ने राजनीति को एक दक्षिण भारतिय फिल्मों की तरह बना दिया है। जैसे इन फिल्मों में कुर्सी के लिए लड़ाई चली होती है बस उसी तरह से ही यहां भी देखने को मिल रहा है को किसका साथ है किसी को कुछ पता नही। 4 प्रमुख पार्टियां महाराष्ट्र की कुर्सी पर बैठने की दौड़ में भाग रही है भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी। इन चारों पार्टियों में को किसका आपना है और कौन पराया है इन पार्टियों को खुद भी नही पता। इस मामले को थोड़ा विस्तार ते समझता हूं कि ये कब शुरू हुआ और कैसे हुआ। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के नतीजे 24 अक्टूबर को आ गए थे यहां 288 सीटों में भारतीय जनता पार्टी ने 105, शिवसेना ने 56, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 54, कांग्रेस पार्टी 44 और बाकी सीटों पर अन्य का कब्जा रहा। बात इसके बाद शुरू हुई जब सरकार बनाने की बारी आई बहुत के लिए किसी के भी पास 145 सीटों का होना अनिवार्य था लेकिन यहां किसी भी पार्टी के पास बहुत नही था इसलिए गठबंधन की सरकार बनाने की बारी थी जिसके लिए सबसे पहले पुराने दोस्त शिवसेना ओर बीजेपी के पास एक बार फिर से महाराष्ट्र की गद्दी पर बैठने का मौका था लेकिन इस बार शिवसेना चाहती थी कि उनकी पार्टी से मुख्यमंत्री बनाया जाए जिस बात को भाजपा ने साफ मना कर दिया। और न बहुत होने के कारण बीजेपी ने सरकार बनाने को भी मना कर दिया । आब बाकी बची 3 पार्टियों को तय करना था कि क्या किया जाए जिसके लिए उन्हें मौका भी दिया गया । शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने आपस मे मिल कर सरकार बनाने का निर्माण लिया लेकिन ये कहानी यू ही खत्म होने बाली न थी पूरे 1 महीने के बाद फिर से एक नया मोड़ आ गया। राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता अजित पवार ने रातो रात आपने साथ पार्टी के कई विदायको को साथ मे लेकर बीजेपी के साथ चले जाने का निर्माण लिया और सरकार बनाई रातो रातो राजनीति के पनो में उलट फेर हो गया सुबह ही देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री की शपथ ली और महाराष्ट्र में फिर से बीजेपी की सरकार बना दी। यह फैसला और ये कार्य इतनी जल्दी हुआ कि सुबह के समाचार पत्रों पर खबर छपी हुई थी कि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे लेकिन न्यूज़ चैनलों में आ रहा था कि देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की शपथ ली।
ऊके बाद एक बार फिर से नया मोड़ आया जब शिवसेना,कांग्रेस, और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने मिल कर अभी विधायकों को इकठ्ठा कर के आपना बहुमत दिखया देवेंद्र फडणवीस 4 दिन के मुख्यमंत्री बने और उन्होंने इस्तीफा देना पड़ा अब 28 तारिक को शिवसेना प्रमुख उदवः ठाकरे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस पूरे घटनाक्रम को देख कर यही लगता है कि आम जनता के वोटों का कोई भी मूल्य नही है राजनीतिक दल जिस तरह से चाहे वो उसका प्रयोग आपने फायदे के लिए कर ही लेते है।
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