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निःशब्द हूँ

रात के 1 बज रहे है लेकिन पता नही आज नींद क्यों नही आ रही। ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हो रहा है अक्सर ऐसा होता है कि कई बार रात को बहुत लेट नींद आती है। लेकिन आज कुछ बात अलग है। समझ नही आ रहा कि कैसे लिखूं मन की बात को। सोशल मीडिया के जरिये पहली बार इस बात का पता चला कि क्या हुआ है हैदराबाद की घटना को पहली बार सुनते ही रूह काम गयी है कि कोई कैसे आपने शरीर की हवस मिटाने के लिए इस हद तक जा सकता है। समझ नही आ रहा कि कौन है ये लोग जो इस तरह की हरकतों को करते हुए जरा भी नहीं सोचते कि इस तरह की हरकतों का समाज पर क्या असर आदत है। देश को तबाह करने में और नीचे गिरने में इस तरह की मानसिकता बाले लोगों का हाथ सबसे ज्यादा है। देश के लिए कुछ कर नही सकते तो कम से कम ऐसी हरकतें तो न करो जिससे यहां रहने बाले लोगो को आपने ही घर में रहने से डर लग जाये। ये डर की बात न केवल उन लड़कियों के लिए है अपितु उस बाप के लिए भी डर की बात है और उस भाई के लिए भी डर की बात ये डर की बात उस पति के लिए भी है और उस बच्चे के लिए भी है जो अपनी बेटी, बहन, पत्नी और अपनी माँ का घर लौटने का इंतजार कर रहे है। आज हर जगह सोशल मीडिया ...

महाराष्ट्र राजनीति का खेल

हाल ही में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों ने राजनीति को एक दक्षिण भारतिय फिल्मों की तरह बना दिया है। जैसे इन फिल्मों में कुर्सी के लिए लड़ाई चली होती है बस उसी तरह से ही यहां भी देखने को मिल रहा है को किसका साथ है किसी को कुछ पता नही। 4 प्रमुख पार्टियां महाराष्ट्र की कुर्सी पर बैठने की दौड़ में भाग रही है भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी। इन चारों पार्टियों में को किसका आपना है और कौन पराया है इन पार्टियों को खुद भी नही पता। इस मामले को थोड़ा विस्तार ते समझता हूं कि ये कब शुरू हुआ और कैसे हुआ। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के नतीजे 24 अक्टूबर को आ गए थे यहां 288 सीटों में  भारतीय जनता पार्टी ने 105, शिवसेना ने 56, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 54, कांग्रेस पार्टी 44 और बाकी सीटों पर अन्य का कब्जा रहा। बात इसके बाद शुरू हुई जब सरकार बनाने की बारी आई बहुत के लिए किसी के भी पास 145 सीटों का होना अनिवार्य था लेकिन यहां किसी भी पार्टी के पास बहुत नही था इसलिए गठबंधन की सरकार बनाने की बारी थी जिसके लिए सबसे पहले पुराने दोस्त शिवसेना ओर बीजेप...

मैं और मेरी गद्दी बोली

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वैसे तो में कांगडा में रहता हूँ, लेकिन हूँ मैं चम्बा जिला के हड़सर गांव से। पहाड़ो के बीच एक छोटा सा गांव हैं। चम्बा जिला के जिस हिस्से से में हूँ उस तरफ ज्यादातर लोग गद्दी हैं और उनकी बोली भी गद्दी ही है। मैं भी इन्हीं लोगो मे से एक हूँ। आज के समय मे युवा वर्ग अपनी संस्कृति को शहरों की तरफ आ कर भूल रहे हैं। आधुनिकीकरण का तूफान इस कदर हमारी संस्कृति पर पड़ रहा है कि युवा अपनी संस्कृति को धीरे-धीरे भूल रहा है आज के समय में माता-पिता भी अपने बच्चों को अपनी संस्कृति से दूर कर रहे हैं। मैं नही कहता कि समय के साथ चलना गलत बात है लेकिन अपनी संस्कृति को छोड़ देना ये भी सही नहीं है। बोली भी हमारी संस्कृति का ही हिसा हैं और जैसे जैसे लोग शहरों की तरफ आ रहे हैं वैसे वैसे वह अपनी बोली को भी गांव में ही छोड़ रहे है। मुझे आपने गांव से दूर रहते हुए लगभग 15 साल हो गए है लेकिन जब से मैं गांव से आया हूँ तब से आपने आप को एक पल भी ऐसा एहसास नही होने दिया कि मैं इस बोली से अलग हो रहा हूँ और न ही कभी इसे बोलने में शर्मिंदगी मेहसूस की। बोली एक हमारी ऐसी पहचान है जिसके जरिये लोग हमें बिना हमारे बारे में पूछे ही...

पच्छाद उपचुनाव में आज़ाद उम्मीदवार उतरेंगे आशीष सिकटा, आज 11 बजे भरेंगे नामंकन

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हिमाचल प्रदेश उपचुनाव में 1 नया मोड़ सामने आया है, पच्छाद से युवाओं की पहली पसंद बन रहा युवा चेहरा आशीष सिकटा ने उपचुनाव में अपनी दावेदारी ठोक दी हैं। ABVP के पूर्व कार्यकर्ता आशीष सिकटा आज 11 बजे आपना आजाद नामांकरण भरने जा रहे है।  माना जा रहा था कि आशीष सिकटा का पच्छाद में भाजपा की तरफ से नाम सामने लिया जाएगा, लेकिन भाजपा ने रीना कश्यप को पच्छाद उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारा है। भजपा में  युवा, कर्मठ और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी से नाराज पच्छाद के युवाओं ने आजाद लड़ने का फैसला कर दिया है। पूरे हिमाचल प्रदेश के कोने-कोने से आशीष सिकटा के समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से शुभकामनाएं दी जा रही है। देखना ये होगा कि पच्छाद की जनता किस तरफ आपना मुह करती है।

सच का इनाम

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सच का इनाम ईमानदारी आज के समय मे शब्द उतना खास लगता नही बस सुने में ही मिलता है और दिखाई कहीं नही देता। आज के समय मे लोग इस शब्द से कोसो दूर हो गए हैं। लेकिन कुछ लोगों को लेकर हम सभी के बारे में यह राय नही बना सकते की कोई भी ईमानदार नही है। इसी तरह 1 घटना मेरे साथ हुई, मैं कुछ आपने काम से आपने घर भाली से जसूर जा रहा था। मेरे घर से जसूर लगभग 30-40 km दूर है। आमतौर पर में बस में नही बल्की अपनी स्कूटी में ही जाता हूं लेकिन आज में बस में गया, और बस में जब भी कहीं जाता हूं तो कई नए लोगों को देखने का मौका मिलता है। तो मैं घर से लगभग 3:15 पर बस स्टॉप पहुंच गया वहाँ मेरे से पहले भी काफी लोग बस का इंतजार करने के लिए खड़े थे। मेरे पहुँचते ही एक हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस भी आ गयी। कुछ लोग बस से उतरे और कुछ बस में चढ़ गये। मेरे पीछे 1 लड़का और भी था देखने में लगभग मेरी ही उम्र का लग रहा था। वो भी मेरे साथ ही बस में चढ़ गया हम बस के पीछे वाले दरबाजे से चढ़े ओर बाकी लोग आगे वाले दरबाजे से चढ़े। बस में बैठने को सीटे न होने के कारण में चलता हुआ आगे कंडक्टर के पास चला गया जो आगे बाले दरबाजे के पास खड़ा था व...

ड्राइवर का तजुर्बा

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बीड़ी पीना भी एक कला है और अगर यह कुछ काम करते हुए पी जाएं और किसी को पता न चले तो यह ओर भी ज्यादा कलाकारी लगती है। हम में से कई लोग अपने सफर के लिए बस का प्रयोग करते है जैसे कहीं जाना हो तो बस में ही जाते है। अच्छा तो जो बस जा सबसे जरूरी व्यक्ति जो  ड्राइवर होता है वो भी अलग अलग तरह के होते हैं कई बिल्कुल साधारण जैसे होते है और कई कुछ कलाकार जैसे होते है। मैं भी बस में बहुत सफर करता हु कई तरह के ड्राइवर देखे हैं। तो ऐसे ही कुछ कलाकार ड्राइवर है जिनकी एक कलाकारी के बारे में बात कर रहा हूँ जो है बीड़ी पीना। जनाब तो ये कलाकार ऐसे होते हैं कि जो मर्ज़ी हो जाये ये बीड़ी पीना नही छोड़ते। ओर कलाकारी भी ऐसी की चलती बस में बीड़ी जला कर पी भी लेते हैं ओर किसी को पता भी नही चलता। ये जनाब अपनी पूरी ठाठ से बीड़ी पीते है और मस्त होकर चलते रहते हैं  ऐसे ही आज इन्हें देख कर इस बीड़ी पाइन की कला से ज्यादा रूबरू हुआ। जनाब बीड़ी भी पी गए और किसी को पता भी नही चला।😂

बस और मोटी आंटी

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दिनांक 10/08/2019 बस में बैठे हुए बोर हो रहा था तो सोचा कुछ किया जाए। बहुत देर फ़ोन में लगे रहने के बाद blog की याद आयी डाऊनलोड किया और लग पड़ा आब यहीं टाइम पास करने। वैसे बता दूँ की में अभी जसूर जा रहा हूँ। कंप्यूटर बीमार हो गया है तब इसके इलाज के लिए वहाँ ही ले जाना पड़ रहा है जहां से इसको बीमारी लगनी शुरू हुई थी। आज मम्मी पापा भी आ रहे है भरमौर से पता नही क्या होना मेरा जब से घर मे समन गया है तब से हाल बेहाल हो गए हैं। बस का सफर भी आपने आप मे नई दुनिया को देखने का होता है। नये नये लोग अलग अलग विचारो से भरे हुए। हाहाहाहा एक आंटी की सकल देख कर कुछ याद आया। अभी थोड़ी देर पहले हम नागनी पहुंचे थे जहां आजकल नागनी माता के दर्शन के लिए लोग आ रहे है बहुत भीड़ हैं वहां। तो हुआ ऐसा की बस लोगो को चढ़ाने के लिए वहाँ रुकी मुझे भी वहीं पर सीट मिली थी में बैठा हुआ था और 1 आंटी वहां बस में चने लगी वेसे देख कर तो ठीक ठाक खाते पीते घर की लग रही थी।  पर इतनी भी मोती नही लग रही थी कि बस में ही न चढ़ा जाये। उस आंटी ने 1 हाट में आइसक्रीम ली हुई थी। और दुसरे हाथ मे पर्स लिया हुआ था 3,4 बाद बस में चढ़ने की कोशि...