निःशब्द हूँ
रात के 1 बज रहे है लेकिन पता नही आज नींद क्यों नही आ रही। ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हो रहा है अक्सर ऐसा होता है कि कई बार रात को बहुत लेट नींद आती है। लेकिन आज कुछ बात अलग है। समझ नही आ रहा कि कैसे लिखूं मन की बात को। सोशल मीडिया के जरिये पहली बार इस बात का पता चला कि क्या हुआ है हैदराबाद की घटना को पहली बार सुनते ही रूह काम गयी है कि कोई कैसे आपने शरीर की हवस मिटाने के लिए इस हद तक जा सकता है। समझ नही आ रहा कि कौन है ये लोग जो इस तरह की हरकतों को करते हुए जरा भी नहीं सोचते कि इस तरह की हरकतों का समाज पर क्या असर आदत है। देश को तबाह करने में और नीचे गिरने में इस तरह की मानसिकता बाले लोगों का हाथ सबसे ज्यादा है। देश के लिए कुछ कर नही सकते तो कम से कम ऐसी हरकतें तो न करो जिससे यहां रहने बाले लोगो को आपने ही घर में रहने से डर लग जाये। ये डर की बात न केवल उन लड़कियों के लिए है अपितु उस बाप के लिए भी डर की बात है और उस भाई के लिए भी डर की बात ये डर की बात उस पति के लिए भी है और उस बच्चे के लिए भी है जो अपनी बेटी, बहन, पत्नी और अपनी माँ का घर लौटने का इंतजार कर रहे है। आज हर जगह सोशल मीडिया में इसके खिलाफ आवाज दिख रही है हर कोई इस बात की निंदा कर रहे है। दर्द तब होता है जब कुछ दिन तक इस बात को लेकर लोगो का दर्द छलकता रहता है और कुछ दिनों बाद इन बातों को इस कदर भूल जाते है जैसे कुछ हुआ ही न हो। हिमाचल में भी 2017 में कुछ इसी तरह की घटना हुई थी जिसका इंसाफ आज तक नही हुआ है हम लोग तो उस बात तो उन्ही दिनों में खत्म कर आपने आपने कामो में व्यस्त हो गए थे। लेकिन आज भी उस गुड़िया के घर बालो की हालत वैसी ही है जिसने अपनी घर के आंगन के फूल को खोया था अर्थात उनसे उनके आंगन के फूल को छीन लिया गया था। पिछले दो दिनों से मीडिया की तरफ भी मेरा इस बात को लेकर ध्यान गया लेकिन हमारे देश की विकाऊ मीडिया ने आम खबरो की तरह पहले शुरू में इस खबर को दिया फिर जब सोशल मीडिया पर जब इस बात की आवाज तो ज्यादा उठते हुए देखा तब इस खबर तो थोड़ा बड़ा कर के दिखाया जाने लगा लेकिन यहाँ भी इस खबर को उस तरह से नही दिखाया जितना दो दिन पहले साध्वी प्रज्ञा के बयान को लेकर हंगामा दिखाया गया था। इस देश के ही कई वुद्धिजीवी लोग जो देश के बड़े बड़े बयान, राजनीति, मूर्तियों आदि पे अपनी बात रखते थे वो भी मीडिया से गायब ही है उनका भी इस मुद्दे पर कोई अवॉर्ड वापसी का ऐलान हुआ। जब तक इस देश के नोजबान को देश के बारे में न समझया जाएगा इस देश की महानता के बारे में नही बताया जाएगा जब तक इस देश के वीर भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद ,विवेकानंद, जैसे महान लोगो के बारे में नही समझाया जाएगा तब तक इस देश को इस तरह के अंधकार से बाहर नही निकाला जाता। मैने आज के कई ऐसे युवाओं को इस देश को गाली देते हुए देखा है कई बार उन्हें इस देश की संस्कृति का मजाक उड़ाते हुए देखा है कई बार उन्हें आपने भाषणों से युवाओं को भटकते हुए देखा है जब तक ये लोग इस तरह से ही अपने ही देश के समाज को भटकते रहेंगे तब तक इस अंधकार के जाते हुए देश और इस देश के युवाओं को कोई नही बचा सकता हैं। अभी कुछ दिन पहले ही देश के एक उच्च शिक्षा संस्थान के बच्चों को फीस बढ़ने पर सड़कों पर उतरते हुए देखा था पुलिस के डंडे खाते हुए देखा था सांसद का घेराव करते हुए देखा था में मानता हूँ उन्होंने जो अपने हक के लिए किया वो ठीक किया लेकिन अब एक बार इस देश मे बदलाव के लिए भी कुछ कर लो एक बार इस तरह से हर रोज लूट रही देश के आबरू के लिए भी कुछ कर लो। सोशल मीडिया में घर में बैठकर हल्ला डालना, कैंडल मार्च करना ये सब कब तक करते रहेंगे कब तक यूँ ही डर के जीते रहंगे कब तक हैदराबाद की आबाज को हैदराबाद में ही और हिमाचल की आबाज को हिमाचल तक ही रखेंगे अब समय आ गया है कि हम लोग पकड़े उन नेताओं को और बतायें की उनको किस काम के लिये कुर्सी पर बैठाया गया है उनका काम जनता की समस्याओं को सुन कर उनका हल करने का है ना कि सिर्फ कड़ी निंदा और बयान देने का नहीं। जब तक इस बीमारी का कोई बड़ा इलाज नही निकलता तब तक ये बीमारी यूँ ही इस देश को बर्बाद करते रहेगी।
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